छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के घुइटांगर गांव के अनिमेष कुजूर ने ग्रीस के एथेंस में आयोजित ड्रोमिया इंटरनेशनल स्प्रिंट मीट में 100 मीटर दौड़ को 10.18 सेकंड में पूरा कर नया भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने नंगे पांव दौड़ से शुरुआत की थी और अब देश के सबसे तेज धावक बन गए हैं।
ने 5 जुलाई 2025 को ग्रीस के एथेंस (वारी) में आयोजित ड्रोमिया इंटरनेशनल स्प्रिंट मीट में 100 मीटर दौड़ को 10.18 सेकंड में पूरा कर नया भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 10.26 सेकंड था, जिसे अनिमेष ने पीछे छोड़ दिया। इस उपलब्धि के साथ ही वे भारत के सबसे तेज धावक बन गए हैं।
अनिमेष का सफर बेहद प्रेरणादायक है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर की पगडंडियों पर नंगे पांव दौड़ने से लेकर अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक पहुंचना उनके संघर्ष और मेहनत का परिणाम है। उनके माता-पिता छत्तीसगढ़ पुलिस में डीएसपी हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार स्थानांतरण के कारण अनिमेष का बचपन महासमुंद और कांकेर में बीता। छठी कक्षा में सैनिक स्कूल अंबिकापुर में चयन के बाद उनकी जिंदगी में अनुशासन और प्रशिक्षण का नया दौर शुरू हुआ। कोविड काल में स्कूल बंद होने के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और खुद को मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत बनाया।
ड्रोमिया मीट में अनिमेष को तीसरा स्थान मिला, जबकि पहला और दूसरा स्थान क्रमशः दक्षिण अफ्रीका और ओमान के धावकों ने हासिल किया। हालांकि, उनका समय भारतीय रिकॉर्ड से बेहतर रहा। इस रेस के बाद अनिमेष ने 200 मीटर दौड़ में भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया है। प्रतियोगिता में उन्होंने 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर, लॉन्ग जंप और हाई जंप में भाग लिया और सभी में स्वर्ण पदक जीते, जिससे उन्हें नई पहचान मिली।
अनिमेष के कोच और परिवार ने उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाई है। ओडिशा के एक कोच ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सही मार्गदर्शन दिया। परिवार चाहता था कि वे सेना में जाएं, लेकिन खेल के प्रति जुनून ने उन्हें एथलेटिक्स में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
उनकी इस उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और खेल मंत्रालय ने उन्हें बधाई दी। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने भी उनके प्रदर्शन की सराहना की है। अनिमेष की कहानी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन से कुछ भी संभव है।