इंदौर ने रचा इतिहास: स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर बना

स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। लगातार आठवीं बार मध्य प्रदेश का इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर बना है। सूरत दूसरे स्थान और नवी मुंबई तीसरे स्थान पर रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। 

स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के पुरस्कार परिणाम 17 जुलाई 2025 को घोषित किए गए, जिसमें मध्य प्रदेश के इंदौर ने एक बार फिर अपना परचम लहराया और लगातार आठवीं बार ‘भारत का सबसे स्वच्छ शहर’ बना। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के लिए गौरव का विषय है। सर्वेक्षण के अंतिम नतीजे नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक भव्य पुरस्कार समारोह में घोषित किए गए, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेता शहरों को सम्मानित किया।

इस वर्ष, कुल 4,500 से अधिक शहरों का 10 प्रमुख मापदंडों और 54 संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। सर्वेक्षण की थीम “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” रही, जो पर्यावरणीय संरक्षण और संसाधनों के पुन: उपयोग को प्रोत्साहित करती है। इंदौर को सुपर लीग श्रेणी में शामिल 23 शहरों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त हुआ, जबकि इसी श्रेणी में सूरत ने दूसरा और नवी मुंबई ने तीसरा स्थान हासिल किया।

सर्वेक्षण के तहत विभिन्न श्रेणियों में क्रमश: अहमदाबाद (बड़े शहर), चंडीगढ़ (3-10 लाख जनसंख्या) व देवास (50 हजार-3 लाख जनसंख्या) जैसी जगहों को भी शीर्ष रैंकिंग मिली। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में अहमदाबाद को सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिला, जबकि भोपाल, लखनऊ, चंडीगढ़ और उज्जैन ने भी विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सभी विजेताओं को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MOHUA) द्वारा सम्मानित किया गया।

इंदौर की लगातार स्वच्छता में शीर्ष स्थान पर रहने के पीछे नगर निगम, सफाई कर्मचारियों तथा आम जनता का सामूहिक प्रयास है। नगर प्रशासन द्वारा कचरा प्रबंधन, कचरा पृथक्करण, सफाई मित्रों की सुरक्षा, जनजागरूकता अभियान और गीला-सूखा कचरा अलग करने जैसी योजनाएं सफल रहीं। इसमें नागरिक सहभागिता और शून्य लैंडफिल नीति भी प्रभावी रही हैं।

समारोह में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, राज्य मंत्री तोखन साहू आदि ने भी शहरों के प्रयासों की सराहना की। सर्वेक्षण की पारदर्शिता और तकनीकी मूल्यांकन प्रणाली ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब बनाया है।

स्वच्छता सर्वेक्षण न केवल पुरस्कार व्यवस्था है, बल्कि यह शहरी भारत का स्वच्छता के मानकों को ऊँचा उठाने, जनता को भागीदार बनाने और देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के स्वप्न का भी आधार है। सभी शहरों को हर साल सीखने और ज़रूरत के हिसाब से अपनी व्यवस्था सुधारने का अवसर है।

स्वच्छता सर्वेक्षण से जुड़े 6 महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्थापना:

    • स्वच्छता सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) की शुरुआत वर्ष 2016 में शहरी भारत की स्वच्छता रैंकिंग करने के लिए की गई थी।

  • मुख्यालय:

    • आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs, MOHUA), नई दिल्ली।

  • वर्तमान प्रमुख:

    • केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री: मनोहर लाल (2025)

      • राज्य मंत्री: तोखन साहू

  • मुख्य उद्देश्य:

    • शहरी स्थानीय निकायों में स्वच्छता के स्तर का आकलन करना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और नागरिकों को स्वच्छता में भागीदार बनाना।

  • 2024-25 की थीम:

    • “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” (Reduce, Reuse, Recycle)

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