एक्सरसाइज पूर्वी प्रचंड प्रहार अरुणाचल प्रदेश के मेचुका में आयोजित की जाएगी। यह सैन्य अभ्यास 11 से 15 नवंबर 2025 तक चलेगा जिसमें भारतीय तीनों सेनाएं यानी थलसेना, नौसेना और वायुसेना संयुक्त रूप से हिस्सा लेंगी। इसका उद्देश्य ऊंचे पहाड़ी इलाकों में संयुक्त सामरिक क्षमता, त्वरित तैनाती, और आधुनिक तकनीक के उपयोग की दक्षता परखना है।
स्थान: मेचुका, अरुणाचल प्रदेश
अवधि: 11-15 नवंबर 2025
सेनाएं: भारतीय थलसेना, नौसेना, वायुसेना (त्रि-सेवा)
उद्देश्य: ऊंचे पर्वतीय इलाकों में सामरिक शक्ति प्रदर्शन, तेजी से तैनाती, समन्वित कार्रवाई
विशेषताएं: स्पेशल फोर्स, ड्रोन, सटीक हथियार प्रणाली, नेटवर्क कमांड एवं मल्टी-डोमेन ऑपरेशन
| अभ्यास का नाम | स्थान | समन्वय | तारीख |
|---|---|---|---|
| प्रचंड प्रहार | अरुणाचल प्रदेश | थलसेना, वायुसेना, नौसेना (त्रि-सेवा) | 11-15 नवंबर |
| त्रिशूल | पश्चिमी सीमा | थलसेना, वायुसेना, नौसेना | मार्च 2025 |
| अन्य प्रमुख अभ्यास | विभिन्न | विविध | वर्ष भर |
भारत ने हाल ही में पूर्वी हिमालय के अत्यंत कठिन और ऊंचे इलाकों में एक प्रमुख त्रि-सेवा सैन्य अभ्यास "पूर्वी प्रचंड प्रहार" आयोजित किया है। यह अभ्यास 11 से 15 नवंबर 2025 के बीच अरुणाचल प्रदेश के मेचुका क्षेत्र में हुआ, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगभग 30 किलोमीटर दूर एक अग्रिम स्थल है। इस अभ्यास में भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से भाग लेकर अपनी सामरिक, तकनीकी और तैनाती क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
पूर्वी प्रचंड प्रहार का मुख्य उद्देश्य ऊंचे पहाड़ी इलाकों में त्वरित सैन्य तैनाती, सटीक और समन्वित हमले, तथा नई तकनीकों का परीक्षण होना है। यह अभ्यास चीन की सीमा के नजदीक सुरक्षा महत्व और रणनीतिक स्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा को लेकर कई चुनौतियां और तनाव उत्पन्न हुए हैं, ऐसे में यह अभ्यास भारतीय सेनाओं की युद्धक तत्परता और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन क्षमता के महत्व को रेखांकित करता है।
यह अभ्यास पूर्वी कमान की निगरानी में हुआ जिसमें दुर्गम पहाड़ी रास्तों, नदी पार करने वाले क्षेत्रों और बर्फ से ढके इलाकों में सैनिकों ने संयुक्त संचालन इस प्रकार किया कि वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों जैसा माहौल बना। सैनिकों ने न केवल तकनीकी उपकरणों जैसे ड्रोन, स्पेशल फोर्स तथा उच्च तकनीक वाले हथियारों का उपयोग बेहतर ढंग से किया, बल्कि संचार और लॉजिस्टिक सपोर्ट में भी उत्कृष्टता दिखाई। इससे न केवल सामरिक कौशल परखने का मौका मिला, बल्कि तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग का भी प्रदर्शन हुआ।
अभ्यास का एक महत्वपूर्ण भाग 'थिएटर कमांड' व्यवस्था का परीक्षण भी था, जहां थल सेना, नौसेना और वायुसेना को एकीकृत कमांड और नियंत्रण प्रणाली के तहत काम करने का अभ्यास कराया गया। इस प्रणाली का उद्देश्य है कि भविष्य के युद्ध में सभी सेनाएं पूर्ण तालमेल से एक-दूसरे के ऑपरेशन्स का समर्थन कर सकें।
साथ ही, इस अभ्यास में बिना पायलट वाले विमान (ड्रोन) और सटीक मारक क्षमता वाले यंत्रों का संयुक्त इस्तेमाल एक नई रणनीतिक दिशा दिखाता है। ड्रोन का इस्तेमाल टोही, निशाना लगाना और लक्ष्यों को बेअसर बनाने में किया गया। इससे भारतीय सैनिकों की युद्धक चपलता और तात्कालिक निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि हुई है।
वर्ष 2025 में भारत ने कई सैन्य अभ्यास किए जिसमें पश्चिमी सीमा पर 'त्रिशूल' नामक अभ्यास भी महत्वपूर्ण था। यह अभ्यास मार्च 2025 में सम्पन्न हुआ, जहां भी त्रि-सेवा सेनाओं ने भाग लिया। इन सभी अभ्यासों का उद्देश्य भारत की रक्षा प्रणाली को आधुनिक, संयुक्त और तेज बनाने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना है।
पूर्वी प्रचंड प्रहार का यह फॉर्मेट भारत की नई युद्ध नीति का हिस्सा है, जो तकनीक, तेजी और तालमेल पर आधारित है। भारतीय सैनिकों ने इस अभ्यास में कठिनतम भौगोलिक परिस्थिति में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। यह अभ्यास भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए भारतीय सेना की बढती तत्परता का प्रमाण है।