कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में शरावती नदी के बैकवाटर्स पर देश के दूसरे सबसे लंबे केबल-स्टेड ब्रिज ‘सिगंदर’ का उद्घाटन 15 जुलाई 2025 को किया गया। 2.44 किलोमीटर लंबे व 16 मीटर चौड़े इस ब्रिज का निर्माण लगभग 470 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है।
15 जुलाई 2025 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के सागर तालुक में भारत के दूसरे सबसे लंबे केबल‑स्टेड ब्रिज ‘सिगंदर ब्रिज’ का उद्घाटन किया। यह पुल शरावती नदी के बैकवाटर्स पर अंबरगोडलु और कलासवल्ली के बीच बना है, जिसे ‘अंबरगोडलु-कलासवल्ली ब्रिज’ भी कहा जाता है।
निर्माण से जुड़ी प्रमुख जानकारी
इसमें 11 मीटर का चौड़ा कैरिजवे और दोनों ओर 1.5 मीटर चौड़े फुटपाथ हैं।
पुल के निर्माण में 604 बॉक्स गर्डर सेगमेंट, 164 पाइल्स (1.8 मीटर व्यास), 96 केबल्स, और 4 पाइलन का उपयोग हुआ है।
इस परियोजना को मार्च 2019 में स्वीकृति मिली थी और निर्माण का काम दिसंबर 2019 में शुरू हुआ।
निर्माण कार्य मध्यप्रदेश की दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड द्वारा किया गया।
स्थापना का महत्व
यह पुल सागर और मरकुटिका को जोड़ता है, जिससे प्रसिद्ध सिगंदूर चौदेश्वरी मंदिर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुधरी है। 1960 के दशक में लिंगानमक्की बांध के निर्माण के कारण क्षेत्र की पारंपरिक सड़कें डूब गई थीं—जिससे हजारों स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए नौकाओं या लंबी सड़क का सहारा लेना पड़ता था। अब इस पुल से गांव और मंदिर पहुंचना आसान, सुरक्षित और तेज़ हुआ है। निर्माण के प्रयास में स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों, और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, सांसद बी.वाई. राघवेंद्र एवं पूर्व मंत्री कगोडु थिम्मप्पा का भी योगदान रहा।
आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
पुल के चालू होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को आने-जाने में ढाई घंटे की बचत होगी।
आपातकाल, स्वास्थ्य सेवा और आपूर्ति हेतु मार्ग हमेशा उपलब्ध रहेगा।
पुल का सुंदर डिजाइन और इंजीनियरिंग आकृति राज्य की पहचान बन सकती है।
लंबाई व चौड़ाई: 2.44 किमी लंबा, 16 मीटर चौड़ा – भारत का दूसरा सबसे लंबा केबल‑स्टेड ब्रिज।
स्थिति: शरावती नदी बैकवाटर्स, सागर तालुक, शिवमोग्गा जिला, कर्नाटक।
निर्माण लागत व एजेंसी: लागत ~470 करोड़ रु., दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड द्वारा निर्माण।
संचालन प्राधिकरण: केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारत सरकार।
प्रमुख लोग: उद्घाटनकर्ता नितिन गडकरी (मंत्री), प्रयासकर्ताओं में बी.एस. येदियुरप्पा (पूर्व मुख्यमंत्री), बी.वाई. राघवेंद्र (सांसद), एवं कगोडु थिम्मप्पा (पूर्व मंत्री)।
सांस्कृतिक महत्व: सिगंदूर चौदेश्वरी मंदिर के लिए सुगम पहुँच, पर्यटन और स्थानीय संस्कृति के लिए उल्लेखनीय योगदान।