नीति आयोग ने ‘‘आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर दलहनों के विकास में तेजी लाने की रणनीतियां’’ नामक रिपोर्ट जारी की है। इसका उद्देश्य 2030 तक दालों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और 2047 तक उत्पादन को दोगुना करने के लिए फसल-वार क्लस्टर, उच्च तकनीक ....
भारत सरकार के नीति आयोग ने देश में दलहन (पल्सेस) उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘‘आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर दलहनों के विकास में तेजी लाने की रणनीतियां और मार्ग’’ शीर्षक वाली विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक और उपभोक्ता देश है, किंतु बढ़ती जनसंख्या और पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमेशा दाल की पर्याप्त उपलब्धता एक चुनौती रही है।
नीति आयोग की यह योजना केंद्र सरकार की ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ पहल के तहत 2030 तक दालों में आत्मनिर्भरता और 2047 तक उत्पादन को दोगुना करना मुख्य लक्ष्य रखती है। वर्तमान में लगभग 5 करोड़ किसानों की आजीविका दलहन उत्पादन पर निर्भर है, लेकिन कुल उत्पादन का 80% वर्षा आधारित क्षेत्रों से आता है। 2015-16 में उत्पादन घटकर 16.35 मिलियन टन रहा था, किंतु सरकारी हस्तक्षेप व प्रोत्साहन के चलते 2022-23 में यह 26.06 मिलियन टन (लगभग 59% वृद्धि) तक पहुंच गया — इस दौरान उत्पादकता में भी 38% की वृद्धि दर्ज की गई और आयात पर निर्भरता 29% से घटकर 10.4% रह गई।
रिपोर्ट के अनुरूप प्रमुख सुझावों में ‘‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’’ के तहत छह वर्ष की योजना, तकनीकी नवाचार, ‘‘वन ब्लॉक, वन सीड विलेज’’ मॉडल, जलवायु-स्मार्ट विस्तार, जिलावार उत्पादन-विशेष रणनीति, और बीज वितरण मॉडल शामिल हैं। खासतौर पर अरहर, काला चना और मसूर जैसी फसलों पर मुख्य फोकस रहेगा। साथ ही, धान की खाली पड़ी जमीन (rice fallow area) को पहचानकर उस पर दलहनी खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे अनुमानित रूप से करीब 28.5 लाख टन अतिरिक्त दलहन उत्पादन संभव है।
योजना के तहत देश के उच्च संभावना वाले जिलों में क्लस्टर मॉडल के जरिये उत्पादकता और क्षेत्र दोनों बढ़ाने पर बल मिलेगा। डेटा-आधारित कृषि निर्णय, प्रिसिजन फार्मिंग, सूखा-रोधी किस्में, बीज बैंक, आधुनिक कृषि उपकरण, और किसान संगठनों के सहयोग से रणनीति अपनाई जाएगी।
सभी योजनाओं के कार्यान्वयन से 2030 तक उत्पादन 34.45 मिलियन टन और 2047 तक 51.57 मिलियन टन तक पहुंचाने का अनुमान है।