भारतीय हॉकी 2025 में अपना शताब्दी वर्ष मना रही है। भारत की पहली हॉकी शासकीय संस्था, "इंडियन हॉकी फेडरेशन" (IHF), 7 नवम्बर 1925 को ग्वालियर में स्थापित की गई थी। इसके निर्माण से भारतीय हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और भारत ने ओलंपिक सहित कई बड़े टूर्नामेंटों में ऐतिहासिक सफलता हासिल की।
2025 में भारतीय हॉकी अपने शताब्दी वर्ष का जश्न मना रही है, जो न सिर्फ भारतीय खेल इतिहास के लिए बल्कि देश की खेल-प्रशासनिक विरासत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। भारत में हॉकी की औपचारिक शुरुआत 7 नवम्बर 1925 को हुई, जब "इंडियन हॉकी फेडरेशन" (IHF) की ग्वालियर में स्थापना हुई। इस ऐतिहासिक संस्था के गठन के साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतिस्पर्धाओं में प्रवेश किया और जल्द ही अपनी प्रतिभा एवं कौशल से विश्व में योगदान दिया।
हॉकी, एक प्राचीन खेल के रूप में विश्व में कई रूपों में विकसित हुआ, लेकिन आधुनिक फील्ड हॉकी का प्रचार-प्रसार भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ। 20वीं सदी की शुरुआत में कोलकाता का बीटन कप और मुंबई का आगा खान टूर्नामेंट बहुत लोकप्रिय हुए, जिससे भारतीय खिलाड़ियों के कौशल को राष्ट्रीय मंच मिला।
IHF के गठन से पूर्व कई प्रयास हुए, लेकिन औपचारिक शासकीय निकाय 1925 में ही अस्तित्व में आया। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय हॉकी का संगठन, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम चयन, और शासकीय मान्यताओं के भीतर विकास करना था। एक वर्ष बाद ही, 1926 में, भारतीय पुरुष टीम ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय दौरा न्यूजीलैंड में किया और शानदार जीत दर्ज की।
IHF के बनने के मात्र 3 साल बाद, 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारत ने पहली बार हिस्सा लिया और वहां से स्वर्ण पदक जीतकर वापसी की। इसके बाद भारत ने ओलंपिक इतिहास में आठ स्वर्ण सहित कई पदक अपने नाम किए। मेजर ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ियों ने भारतीय हॉकी को अमर किया। 1928 से 1956 तक भारत की हॉकी टीम अपराजेय रही— प्रत्येक ओलंपिक में गोल्ड जीता और विश्व में भारतीय हॉकी की विशेष पहचान बनी।
लंबे समय तक IHF ने भारतीय हॉकी का संचालन किया, लेकिन समय के साथ अनेक विवाद और निष्पादन में जटिलताएं सामने आईं। 2008 में प्रशासकीय असंतोष और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद IHF को स्थगित कर दिया गया। इसके स्थान पर 2009 में "हॉकी इंडिया" नामक नई संस्था का गठन हुआ, जिसे FIH (फेडरेशन इंटरनेशनल डि हॉकी) और Indian Olympic Association (IOA) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
भारतीय हॉकी का स्वर्णिम युग 20वीं सदी में देखने को मिला, जब टीम ने कई एशियाई और ओलंपिक खिताबों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। ध्यानचंद, बलबीर सिंह, के.डी. सिंह 'बाबू', धनराज पिल्लै, सरदार सिंह और हरमनप्रीत सिंह जैसे नाम भारतीय हॉकी की विरासत को संजोते हैं। महिलाओं की टीम भी समय के साथ मजबूत हुई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर श्रेष्ठता स्थापित की।