भारत का वह विश्व-धरोहर स्थल जिसे (IUCN) ने “Good” रेटिंग दी है – Khangchendzonga National Park

भारत का एकमात्र ऐसा विश्व धरोहर स्थल जिसे IUCN (International Union for Conservation of Nature) ने ‘Good’ रेटिंग दी है, वह है सिक्किम में स्थित खंगचेंद्जोंगा नेशनल पार्क। यह पार्क भारत का पहला "मिश्रित" यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध है।

खंगचेंद्जोंगा नेशनल पार्क को 2025 में IUCN ने ‘Good’ रेटिंग दी, जो कि भारत का एकमात्र ऐसा प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल है जिसने यह मान्यता प्राप्त की। यह सिक्किम में स्थित है और 1784 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जो माउंट खंगचेंद्जोंगा (8586 मीटर) की बर्फीली चोटियों से लेकर सबट्रॉपिकल जंगलों तक विस्तृत है। यह पार्क 280 ग्लेशियरों, 70 से अधिक ग्लेशियल झीलों और हिमालयी बाघ, हिम ताहर, लाल पांडा सहित दुर्लभ जीवों का आवास है। स्थानीय लेप्चा समुदाय के लिए इसे ‘मयेल ल्यांग’ यानी देवताओं द्वारा दिया गया स्वर्ग माना जाता है, जबकि तिब्बती बौद्धों के लिए यह पवित्र घाटी है। इस संरक्षण क्षेत्र में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके कारण इसे IUCN का 'Good' रेटिंग मिला है, जो अन्य भारतीय धरोहर स्थलों के मुकाबले बेहतर स्थिति दर्शाता है।

खंगचेंद्जोंगा नेशनल पार्क भारत का पहला मिश्रित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है जिसे न केवल इसके अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता के लिए भी मान्यता मिली है। 2016 में यह पार्क यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ था।

यह पार्क सिक्किम राज्य के उत्तर में 1784 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह क्षेत्र हिमालय की तीसरी सबसे ऊँची चोटी माउंट खंगचेंद्जोंगा (8,586 मीटर) से लेकर नीचे के सबट्रॉपिकल जंगलों और घास के मैदानों तक विस्तृत है।

भौगोलिक और प्राकृतिक विशेषताएं

  • पार्क में करीब 280 ग्लेशियर और 70 से अधिक ग्लेशियल झीलें हैं, जो इसे जल संरक्षण और पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण बनाती हैं।

  • यहां हिमालयी ताहर, हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), बादलदार तेंदुआ, लाल पांडा, और नीले भेड़ जैसे दुर्लभ और संकटग्रस्त जीव पाए जाते हैं।

  • पक्षी विविधता भी अत्यंत समृद्ध है, जिसमें इम्पियन फेजेंट और सैटर ट्रैगोपान जैसे प्रवासी और स्थानिक पक्षी शामिल हैं, जिनकी संख्या 550 से अधिक है।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

  • खंगचेंद्जोंगा को स्थानीय लेप्चा समुदाय ‘मयेल ल्यांग’ के नाम से जानते हैं, जिसका अर्थ है 'देवताओं द्वारा दिया गया छिपा हुआ स्वर्ग'। यह क्षेत्र उनके लिए पवित्र माना जाता है।

  • तिब्बती बौद्धों के लिए यहां एक पवित्र घाटी (बयुल) के रूप में सम्मानित है। क्षेत्र में प्राचीन थोलुंग मठ जैसे धार्मिक केंद्र मौजूद हैं जो आध्यात्मिक परंपराओं को संरक्षित करते हैं।

  • यह सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का संयोजन एक असाधारण संरक्षण मॉडल का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

IUCN World Heritage Outlook की रिपोर्ट में स्वाभाविक और मिश्रित विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण की स्थिति चार श्रेणियों में बांटी जाती है:

  1. Good (अच्छा) – संरक्षण की स्थिति और प्रबंधन प्रभावी है, खतरे कम हैं।

  2. Good with Some Concerns (कुछ चिंताओं के साथ अच्छा) – स्थिति सामान्यतः अच्छी है लेकिन कुछ संरक्षण चुनौतियां मौजूद हैं।

  3. Significant Concern (गंभीर चिंता) – संरक्षण की स्थिति चिंताजनक है, तत्काल सुधारों की जरूरत है।

  4. Critical (गंभीर संकट) – संरक्षण की स्थिति बेहद खराब है, त्वरित और गंभीर कार्रवाई आवश्यक है।

खंगचेंद्जोंगा नेशनल पार्क को ‘Good’ रेटिंग मिली है, जो इस चार श्रेणी के मॉडल में सबसे अच्छी श्रेणी है, यानी यहाँ संरक्षण और प्रबंधन की स्थिति बेहतर है, और खतरे अपेक्षाकृत कम हैं। इस प्रकार यह भारत के अन्य कई स्थलों के मुकाबले उच्चतम श्रेणी में आता है।

IUCN ‘Good’ रेटिंग का महत्व

  • IUCN ने 2025 की अपनी चौथी विश्व धरोहर आउटलुक रिपोर्ट में खंगचेंद्जोंगा नेशनल पार्क को ‘Good’ रेटिंग दी। यह रेटिंग विश्व के कुल 271 प्राकृतिक और मिश्रित विश्व धरोहर स्थलों में अत्यंत कम संख्या में दी जाती है, जो प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिति को दर्शाती है।

  • भारत के दूसरे बड़े धरोहर स्थल जैसे पश्चिमी घाट, सुंदरवन, और मानस वन्यजीव अभयारण्य को ‘Significant Concern’ की श्रेणी में रखा गया है, जबकि खंगचेंद्जोंगा अब तक ‘Good’ की विशिष्ट स्थिति में है।

संरक्षण के कारण

  • पार्क का स्थितिकरन क्षेत्र बहुत ही दूर-दराज और कम आबाद है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप सीमित है।

  • स्थानीय वनरक्षकों और समुदाय के बीच प्रभावी सहयोग के कारण पारिस्थितिकी तंत्र बने रहने में मदद मिलती है।

  • 2018 में इसे बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में घोषित किया गया, जिसके तहत बफर जोन में सतत कृषि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहित किया जाता है।

  • नेपाल के कंचनजंगा संरक्षण क्षेत्र के साथ सीमा पार सहयोग से पारिस्थितिकी की बहु-राज्यीय रक्षा सुनिश्चित होती है।

  • 2024 में ग्लेशियल झीलों में अचानक आई बाढ़ के दौरान भी बेहतर रोकथाम और प्रबंधन ने नुकसान को कम किया।


    खंगचेंद्जोंगा नेशनल पार्क – प्रश्नोत्तर

    Q1: खंगचेंद्जोंगा नेशनल पार्क को IUCN ने कब और किस रिपोर्ट में ‘Good’ रेटिंग दी?
    → अक्टूबर 2025 में जारी IUCN की ‘World Heritage Outlook 4’ रिपोर्ट में।

    Q2: भारत के अन्य विश्व धरोहर स्थलों की तुलना में यह पार्क ‘Good’ रेटिंग क्यों पा सका है?
    → यहाँ प्रबंधन स्थिति बेहतर, स्थानीय समुदाय की भागीदारी सक्रिय, और मानव दबाव कम होने जैसे कारण हैं। अन्य स्थलों को ‘Good with Some Concerns’ या ‘Significant Concerns’ मिली हैं।

    Q3: इस पार्क के लिए मुख्य पर्यावरणीय और संरक्षण संबंधी खतरे क्या हैं?
    → हिमालयी ग्लेशियर पिघलना, ग्लेशियल झीलों का अचानक टूटना, बढ़ता पर्यटन दबाव, और भूमि उपयोग में परिवर्तन मुख्य खतरे हैं।

    Q4: आपदा-प्रबंधन के क्षेत्र में इस पार्क का उदाहरण क्या है?
    → ग्लेशियल झील टूटने (Glacial Lake Outburst Flood - GLOF) की घटना के लिए पूर्व चेतावनी मानचित्रण और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र का सफल उपयोग।

    Q5: इस उपलब्धि पर वर्तमान (2025) में सिक्किम सरकार और केंद्र सरकार की क्या प्रतिक्रियाएं हैं?
    → सिक्किम सरकार ने संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरणीय नियम कड़े किए हैं। केंद्र सरकार ने इस सफलता को राष्ट्रीय संरक्षण नीति में मॉडल के रूप में अपनाने और अन्य धरोहर स्थलों के लिए कार्य योजनाएं बनाने की पहल की है।

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