मछलीपट्टनम के नजदीक मंगिनापुडी में बनाए जा रहे ग्रीनफील्ड बंदरगाह का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसके 2026 के अंत तक चालू होने की संभावना है। यह बंदरगाह आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के लिए व्यापार, निर्यात और रोज़गार के नए अवसर प्रदान करेगा।
मछलीपट्टनम, आंध्र प्रदेश का एक प्राचीन बंदरगाह शहर है, जिसे ऐतिहासिक रूप से मसूलीपट्टनम या मैसोलिया के नाम से जाना जाता है। यह अपने शानदार व्यापारिक इतिहास और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध रहा है। वर्तमान में आधुनिक मंगिनापुडी बंदरगाह का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसका लगभग 50% हिस्सा पूरा हो चुका है। यह बंदरगाह 2026 के अंत तक व्यापारिक संचालन के लिए खुल जाएगा।
इतिहास और महत्व
मछलीपट्टनम बंदरगाह पहली शताब्दी में ही व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित हो गया था। सातवाहन वंश के दौरान यह बंदरगाह रोम, चीन, फारस और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ मसाले, कपास के वस्त्र, चीनी व हाथी जैसे माल का निर्यात करता था। 1867 के चक्रवात और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इसका महत्व कम हो गया था, जिसे अब एक ग्रीनफील्ड बंदरगाह के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है।
स्थापना व संरचना
यह ग्रीनफील्ड बंदरगाह आंध्र प्रदेश समुद्री बोर्ड द्वारा शुरू किया गया है और इसके लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV)- ‘मछलीपट्टनम पोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ बनाई गई है। यह बंदरगाह लगभग 2000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें आधुनिक सुविधा और संबंध सुधारे गए हैं। इसका संचालन लैंडलॉर्ड मॉडल पर होगा; प्रारंभिक चरण में इसमें 4 बर्थ बनेंगे, जिन्हें भविष्य में 16 तक बढ़ाया जा सकता है।
हेडक्वार्टर और प्रमुख अधिकारी
बंदरगाह का मुख्यालय कृष्णा जिले के मछलीपट्टनम में होगा। इस परियोजना में मुख्य भूमिका राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों एवं आंध्र प्रदेश समुद्री बोर्ड के सदस्यों की है। परियोजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी द्वारा किया गया था।
आर्थिक और सामरिक महत्व
मंगिनापुडी बंदरगाह के चालू हो जाने से कोयला, उर्वरक, फार्मा, सीमेंट सहित विभिन्न माल व कंटेनर ट्रैफिक में वृद्धि होगी। इसके अलावा तेलंगाना से सीधा मालवाहक कॉरिडोर और ड्राय पोर्ट सुविधा मिलने से क्षेत्रीय व्यापार में अद्वितीय विकास संभव होगा। स्थानीय लोगों को भूमि मूल्य में वृद्धि और नए रोज़गार के अवसर मिलेंगे।