8 सितंबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है, जिसका विषय है "Promoting Literacy for a World in Transition"। इस विषय के माध्यम से सतत और शांतिपूर्ण समाज के लिए साक्षरता की नींव पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर साल 8 सितंबर को मनाया जाता है। UNESCO ने इस दिन की स्थापना 1966 में की थी, जिसका उद्देश्य लोगों, समुदायों और समाजों में साक्षरता के महत्व को रेखांकित करना है। वर्ष 2025 का थीम “Promoting Literacy for a World in Transition” है, जो बदलती तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच साक्षरता को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।
साक्षरता आज केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं रही; इसे अब व्यापक अर्थों में देखा जाता है जिसमें डिजिटल साक्षरता, सूचना जागरूकता, मीडिया समझ और बहुभाषी संवाद कौशल भी शामिल हैं। डिजिटल युग ने न केवल नए अवसर पैदा किए हैं, बल्कि असमानता और डिजिटल विभाजन भी बढ़ाए हैं, जिसके लिए जागरूक नीतियों व प्रयासों की आवश्यकता है।
समाज में साक्षरता के बिना संवाद, शिक्षा, रोजगार और नागरिक अधिकारों की प्राप्ति असंभव हो जाती है। इस दिन विभिन्न देशों, शिक्षण संस्थानों, सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार और अभियान आयोजित किए जाते हैं ताकि साक्षरता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास हो सकें।
इस वर्ष के विषय के तहत, वैश्विक स्तर पर यह प्रयास किया जा रहा है कि सभी वर्गों विशेषकर वंचित, बच्चों, और महिलाओं को साक्षरता के समुचित अवसर मिले और सतत विकास तथा सामाजिक शांति सुनिश्चित हो सके। UNESCO और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन भी डिजिटल युग में साक्षरता के नए आयाम विकसित करने के लिए नीतियां बना रहे हैं, ताकि सभी को ज्ञान तक पहुंच मिले और वे सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
साक्षरता केवल व्यक्तिगत शिक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक विकास की नींव भी है, जो वैश्विक स्तर पर शांति, समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दिन हमें सिखाता है कि शिक्षा और साक्षरता मानवाधिकार का मौलिक हिस्सा है, जिसे हर सरकार, समुदाय और व्यक्ति को सुनिश्चित करना चाहिए।