UBS Global Wealth Report 2025 के अनुसार भारत करोड़पतियों की संख्या में विश्व में 14वें स्थान पर है। भारत में लगभग 9,17,000 करोड़पति हैं, जो देश की बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक स्तर पर संपत्ति वितरण का द्योतक है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल व्यक्तिगत संपत्ति विश्व की संपत्ति का लगभग 3.4% है।
यह रिपोर्ट वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका को दर्शाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका पहले स्थान पर है, उसके बाद चीन तथा फ्रांस, जापान, ब्रिटेन जैसे देश हैं। इन देशों में करोड़पतियों की संख्या बहुत ज्यादा है, फिर भी भारत का 14वां स्थान भविष्य की संभावनाओं की ओर इशारा करता है। भारत के करोड़पति संवर्ग में नवाचार, डिजिटल टेक्नोलॉजी, बढ़ते उपभोग, और उद्यमिता में लगातार विस्तार हो रहा है।
रिपोर्ट ने यह भी दर्शाया है कि भविष्य में पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर करोड़पतियों की संख्या करीब 9% और बढ़ सकती है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी निश्चित रूप से और ऊँची होगी। आर्थिक समावेशन, निवेश के नए माध्यम, और वित्तीय शिक्षा के बढ़ते कदमों से भारत में धनवान व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह विकास दर उसे दशक के अंत तक शीर्ष दस देशों में शामिल कर सकती है।
भारत की धन-संपन्नता में वृद्धि के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं –
तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप्स का विस्तार
उद्यमिता एवं संसाधनों का समान वितरण
व्यक्तिगत निवेश के नए माध्यम
ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संपत्ति का प्रसार
सरकारी नीतियाँ और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, निजी संपत्ति का बड़ा हिस्सा अभी भी शहरी क्षेत्रों में ही है, लेकिन हाल के वर्षों में छोटे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भी धन वितरण तेजी से बढ़ रहा है। मेट्रो शहरों के अलावा टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में भी करोड़पति बनने का चलन बढ़ता जा रहा है।
रिपोर्ट ने “EMILLIs” अथवा “Everyday Millionaires” (एक से पांच मिलियन डॉलर संपत्ति वाले लोग) की श्रेणी को भी तेजी से बढ़ता हुआ बताया है। भारत में ऐसे अमीर लोगों की संख्या वर्ष 2000 से चार गुना बढ़ चुकी है, जो भारत की आर्थिक स्थिरता एवं समावेशी वृद्धि का संकेत है।